पुरुषों के बाद महिलाओं भी सेमीफाइनल में, क्या हॉकी में भारत के पुराने दिन लौटने लगे हैं?
नई दिल्ली एक दिन पहले (India Men Hockey Team) ने 49 साल बाद ओलिंपिक के सेमीफाइनल में प्रवेश किया था और अब रानी रामपाल की अगुआई में महिला टीम () ने तोक्यो ओलिंपिक 2020 () के अंतिम-4 में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। ऐसे में सबके मन में अब यही सवाल उठ रहा है कि क्या भारतीय हॉकी के पुराने दिन लौटने लगे हैं? भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम पिछले कुछ वर्षों से इंटरनैशनल स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। ऐसे में करोड़ों भारतवासी अब टीम से गोल्ड जीतने की उम्मीद लगा रहे हैं। गुरजीत कौर ने दागा इकलौता गोल खेलों के महाकुंभ ओलिंपिक में वर्ल्ड की 9वें नंबर की टीम भारत ने महिला हॉकी में पहली बार अंतिम-4 का टिकट कटाया है। गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) के गोल और गोलकीपर सविता (Savita Punia) की अगुवाई में रक्षापंक्ति के बेहतरीन प्रदर्शन से भारतीय महिला हॉकी टीम ने सोमवार को खेले गए क्वार्टर फाइनल में आस्ट्रेलिया को 1-0 से हरा दिया। महिला टीम का सेमीफाइनल में सामना बुधवार को अर्जेंटीना से होगा जिसने एक अन्य क्वॉर्टर फाइनल में जर्मनी को 3-0 से हराया। मास्को ओलिंपिक में भारतीय महिलाए चौथे स्थान पर रही थी भारतीय महिलाएं 41 वर्षों में पहली बार ओलिंपिक खेलों के क्वॉर्टर फाइनल में जगह बनाई थी। इससे पहले भारतीय महिला टीम का ओलिंपिक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1980 में मास्को ओलिंपिक में रहा जहां वह सेमीफाइनल में पहुंची थी लेकिन आखिर में उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था। यह वही बहुमूल्य फोटो है जहां से ओलिंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपनी स्वर्णिम शुरुआत की थी। साल 1928 एम्सटर्डम ओलिंपिक में भारत ने मेजबान नीदरलैंड को हराकर पीला तमगा हासिल किया था। हॉकी टीम ने ओलिंपिक खेलों में 1928 से 1956 के बीच छह बार लगातार गोल्ड मेडल जीते। तब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद (Dhyan Chand) पूरी तरह छा गए थे। भारत के इस महान खिलाड़ी ने टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 14 गोल दागे, जबकि पूरी टीम ने 5 मैचों में कुल 29 गोल किए थे। नीदरलैंड के खिलाफ ध्यानचंद ने हैटट्रिक दागते हुए टीम को गोल्ड मेडल दिलवाया था। इसके बाद भारत ने 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980 में गोल्ड मेडल जीता था। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 1960 में सिल्वर जबकि 1968 और 1972 में ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया था। एक समय भारतीय टीम की ओलिंपिक में तूती बोलती थी। दिग्गज मेजर ध्यानचंद की स्टिक से गेंद ऐसी चिपक जाती थी मानो उसमें गोंद लगा हो। खेलों के महाकुंभ ओलिंपिक में कई वर्षों तक एकछत्र राज करने वाली भारतीय टीम के प्रदर्शन में 1980 के बाद से लगातार गिरावट आई। 1984 लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में पांचवें स्थान पर रहने के बाद वह इससे बेहतर नहीं कर सकी। लेकिन अब अर्से बाद भारतीय टीम ने करोड़ों देशवासियों को खुशी का मौका दिया है। ओलिंपिक में कब-कब जीते मेडलभारतीय हॉकी टीम ने रेकॉर्ड 11 मेडल ओलिंपिक में जीते हैं। इसमें 8 गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। ऐसा करने वाली दुनिया की इकलौती हॉकी टीम है। ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद धमाकेदार वापसी से चौंकाया ऑस्ट्रेलिया के हाथों 1-7 से मिली हार के अलावा भारतीय टीम (India vs Australia) ने अभी तक शानदार हॉकी खेली है। सेमीफाइनल में भारत का सामना विश्व चैम्पियन बेल्जियम से होगा, जिसने तीसरे क्वॉर्टर फाइनल मैच में स्पेन को 3-1 से हराया। दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की टीमें भिड़ेंगी। जर्मनी ने जहां दिन के पहले मुकाबले में ओलिंपिक चैम्पियन अर्जेंटीना को 3-1 से हराया वहीं ऑस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड्स को पेनाल्टी शूटआउट के बाद 3-0 से हराया।
from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3jj0m3E
No comments