टीम को 'चक दे' लम्हा देने वाले कोच ने अपने घर पर दिया एक खास संदेश, 'आने में देरी होगी'
तोक्यो हूटर बजते ही इतिहास बन गया। भारतीय महिला हॉकी टीम सेमीफाइनल में थी। ओलिंपिक के इतिहास में पहली बार। 1980 के बाद उसे 36 साल तक ओलिंपिक में जगह बनाने का इंतजार करना पड़ा। हालांकि वह ओलिंपिक भी भुला देने वाल रहा। सभी मैच हारे। तोक्यो में भी किसी करिश्मे की उम्मीद नहीं थी। शुरुआत भी वैसी ही हुई। तीन हार, लगातार। पर फिर तस्वीर पलटी। एक के बाद एक लगातार तीन जीत। और अब भारतीय महिला हॉकी टीम खिताबी मुकाबले से बस एक कदम दूर है। सोर्ड मारजेन वह शख्स हैं जिन्हें इस टीम पर भरोसा था। वह भी तब जब ज्यादातर लोगों को नहीं था। वह महिला हॉकी टीम के कोच हैं। वह टीम के साथ चार साल से काम कर रहे थे। टीम को बदल रहे थे। उसकी फिजिकल फिटनेस। उसकी रणनीति को। उसके खेलने के तरीके को। और सबसे बढ़कर उसकी सोच को। वह जानते हैं कि खेल मैदान से पहले दिमाग में खेला जाता है। मैदानी रणनीति, चतुराई, चपलता और दमखम से पहले मानसिक रूप से उसकी रूपरेखा तैयार करनी होती है। खेल कोई भी हो मानसिक रूप से मजबूत हुए बिना उसे जीत पाना बहुत मुश्किल है। मैच के बाद मारजेन ने अपने दिल की बात कही। वह जानते थे कि मुकाबला कड़ा था। ऑस्ट्रेलिया दुनिया की चोटी की टीम है। बेहद मजबूत। आक्रामक और ताकत से पलटवार करने वाली। भारत के खिलाफ गोल खाने के बाद भी वह रुक नहीं रही थी लेकिन डिफेंस की अभेद्य दीवार के पार वह जा नहीं सकी। मारजेन ने कहा, 'मेरा दिल कैसा है? यह अब भी काम कर रहा है। मैं सोच रहा था ggahhh लेकिन बीते तीन मैचों में मेरे साथ ऐसा ही हो रहा है।' हो भी क्यों न? आखिर बीते तीनों मैच हुए ही ऐसे हैं। हर मैच डू ओर डाई। यानी करो या मरो। जीते तो उम्मीद कायम, हारे तो घर का टिकट कन्फर्म। उन्होंने ट्वीट कर भी कहा, 'सॉरी फैमिली, मैं फिर देर से आऊंगा।' यानी उन्होंने अपने परिवार से थोड़ा इंतजार करने को कहा। साथ ही इसमें कहीं न कहीं उन लोगों के लिए भी संदेश छुपा है जो टीम का सफर जल्द ही खत्म होने की बात कर रहे थे। मारजेन ने कहा, 'ओह मैन, हमने जो करने की कोशिश की और हमने जो किया वह मैच दर मैच आगे बढ़ता रहा। अब हम अगले मैच में किस चीज का सुधार कर सकते हैं और फिर उससे अगले मैच में।' भारतीय डिफेंस की खूब तारीफ हो रही है लेकिन नीदरलैंड्स के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि डिफेंस बहुत ज्यादा मजबूत नहीं था। उन्होंने कहा, 'डिफेंस बहुत ज्यादा अच्छा नहीं था खास तौर पर सर्कल में डिफेंड नहीं कर पाए। तो हम उस पर ध्यान रखेंगे। इससे आपका ध्यान जीत और हार से इतर पर रहता है।' उन्होंने कहा, 'यह माइंडसेट की बात है। मैंने लड़कियों से कहा था, हमारे पास खोने के लिए कुछ है नहीं, तो खुलकर खेलो और उन्होंने आज यही किया। यह सपने के पूरे होने की तरह है। यह वाकई चक दे इंडिया मूवमेंट ही था।' भारतीय टीम का अगला मैच अर्जेंटीना से होगा जिसने जर्मनी को 3-0 से हराया था।
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