तोक्यो ओलिंपिक: दबाव को किया दरकिनार, देखें गुरजीत का वह गोल जिसने भारतीय महिला हॉकी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया
तोक्यो किस्मत बहादुरों का साथ देती हैं। उनका साथ देती हैं जो बीती असफलताओं को भुलाकर आगे बढ़ने की हिम्मत रखते हैं। गुरजीत ने वही किया। खेल के दूसरे क्वॉर्टर में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। नजरें गुरजीत पर थीं। उन्होंने इस बार दम लगाया। किस्मत का साथ मिला। 22वें मिनट में स्कोरलाइन थी भारत-1, ऑस्ट्रेलिया-0। इससे पहले टीम का प्रदर्शन पेनाल्टी कॉर्नर पर खराब रहा था। ग्रुप मैचों में उसे 33 पेनाल्टी कॉर्नर मिले थे और सिर्फ चार गोल हुए थे। और वह भी वैरिएशन से। ऐसे में ड्रैग फ्लिकर गुरजीत पर दबाव था। मैच बड़ा था। मौका भी। यहां चूकने का अर्थ था मौका गंवाना। और ऑस्ट्रेलिया को खुलकर खेलने का मौका देना। पर इस बार गुरजीत ने गलती नहीं की। स्टिक से जोर लगाकर गेंद को जो धकेला तो भारत को बढ़त दिला ही दी। यहां उसे किस्मत का साथ मिला। वही किस्मत जो भारतीय हॉकी टीम की मेहनत के साथ चल रही है। और कहते हैं किस्मत बहादुरों का साथ देती है। गेंद गोल पोस्ट में जाने से पहले ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडरों से डिफ्लेक्ट होकर गई। लेकिन क्या फर्क पड़ता है। खाते में भारतीय टीम के गोल आया। अहम गोल। और इसी गोल ने हार-जीत का अंतर तय कर दिया। भारतीय टीम ने इसके बाद ऐसा मजबूत खेल दिखाया कि चोटी की टीम कही जाने वाली ऑस्ट्रेलिया इस किले को भेद नहीं पाई। डिफेंडर्स के साथ गोलकीपर सविता पूनिया ने कमाल का खेल दिखाया। कंगारू टीम हमले करती रहिए। गुरजीत से उम्मीदें थीं और उन्होंने उसे पूरा किया। एक ही मौका और उस पर चूकी नहीं। अमृतसर के गांव मियादी कलां में 25 अक्टूबर 1995 को एक किसान परिवार में पैदा हुईं गुरजीत ने स्कूल से हॉकी खेलनी शुरू की। और धीरे-धीरे भारतीय टीम तक जगह बनाई।
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