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हरियाणा का शाहाबाद...जहां के खून में है हॉकी, अब यहां की छोरियों ने मनवाया लोहा!

शाहाबाद (कुरुक्षेत्र) में () ने इतिहास रच दिया है। वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर 2 ऑस्ट्रेलिया को क्वॉर्टर फाइनल () में हराकर भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बना ली है। भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में यह पहली बार है कि टीम ने ओलिंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इस जीत के साथ ही हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित छोटे से कस्बे शाहाबाद () का भी जलवा दोबारा दिखा है। क्वॉर्टर फाइनल में खेलीं कप्तान रानी रामपाल () और मिडफील्डर नवजोत कौर (Navjot Kaur) हरियाणा के शाहाबाद से ही हैं। फील्ड हॉकी के क्षेत्र में शाहाबाद का एकछत्र दबदबा रहा है। इस छोटे से कस्बे ने भारतीय हॉकी को कई इंटरनैशनल प्लेयर्स दिए। गुरदीप सिंह भुल्लर, संजीव कुमार डांग, ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह जैसे कुछ नाम इनमें से एक हैं। इनके अलावा नरिंदर शर्मा, बलदेव सिंह अटारी, जतिंदर सिंह, दयानंद मदान, घनश्याम दास और भूपिंदर सिंह भिंडी ने भी फील्ड हॉकी में भारत के लिए खेला है। मौजूदा महिला नैशनल हॉकी स्क्वॉड में ऐसी 12 खिलाड़ी हैं जिनका जन्म या तो शाहाबाद में हुआ या उन्होंने यहां से ट्रेनिंग ली। इनमें ओलिंपिक क्वॉर्टरफाइनल जीत की नायिका रानी रामपाल और मिडफील्डर नवजोत कौर का भी नाम शामिल है। रानी रामपाल ने मुफलिसी से की लड़ाई, 6 साल की उम्र में थाम ली हॉकीभारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल ने 6 साल की उम्र से ही हॉकी थाम ली थी। रानी रामपाल के पित घोड़ागाड़ी चलाते थे। कम उम्र में ही हॉकी पकड़ने की उनकी जिद को शुरुआत में किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। मगर 9 साल की उम्र में ही उन्होंने शाहाबाद हॉकी अकादमी में दाखिला ले लिया और द्रोणाचार्य अवॉर्डी बलदेव सिंह से हॉकी सीखी। 14 साल की उम्र में ही उन्हें नैशनल हॉकी टीम में शामिल कर लिया गया, जिससे वह सबसे कम उम्र की महिला हॉकी प्लेयर बन गईं। 2009 में चैंपियंस चैलेंज टूर्नमेंट के फाइनल में रानी ने 4 गोल दागे और टीम को जीत दिलाई। 2009 के एशिया कप में टीम के सिल्वर मेडल जीतने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। रानी को 2020 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड और पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। रानी को अपना आदर्श मानती हैं नवजोत कौरमिडफील्डर नवजोत कौर ने अपने इंटरनैशनल करियर में 100 से ज्यादा मैच खेले हैं। रानी की तरह ही नवजोत कौर भी बेहद सामान्य परिवार से आई हैं और उनके पिता एक मकैनिक हैं। रियो 2016 में खेलने से पहले नवजोत ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरे ओलिंपिक में खेलने का असली मतलब मेरे मां-बाप जानते हैं, वे उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब मैं रियो में हॉकी के मैदान में उतरूंगी। रियो ओलिंपिक तो नहीं मगर तोक्यो ओलिंपिक में नवजोत और उनकी टीम ने कमाल कर दिखाया है और अब सेमीफाइनल में अर्जेंटीना से उनकी टीम का मुकाबला होगा। नवजोत टीम की कप्तान रानी रामपाल को अपना आदर्श मानती हैं। शाहाबाद के 'फ्लिकर सिंह' का दुनिया ने माना लोहा, अब हरियाणा में खेल मंत्रीशाहाबाद को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का सबसे बड़ा श्रेय भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को जाता है। अपनी तेज ड्रैग फ्लिक के लिए मशहूर संदीप सिंह ने जनवरी 2004 में सुल्तान अजलान शाह कप से डेब्यू किया था। हालांकि इसके बाद ही एक हादसे में उनकी कमर में गोली लग गई जिससे वह बिल्कुल मरणासन्न हालत में पहुंच गए और लगा कि यहां से उनका करियर खत्म हो जाएगा। मगर संदीप सिंह ने हिम्मत दिखाई और अपनी इंजरी से उबरकर हॉकी में एक से एक रेकॉर्ड बनाए। 2008 और 2009 के अजलान शाह कप में वह टॉप स्कोरर रहे। इसके अलावा एशियन गेम्स 2010 में 11 गोल दागकर टॉप स्कोरर बने। 2010 में 145 किमी/घंटे से की गई उनकी ड्रैग फ्लिक आज भी एक रेकॉर्ड है। संदीप ने 2012 के लंदन ओलिंपिक के क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 16 गोल दागे जिनमें अकेले 5 फाइनल में किए। फिलहाल वह हरियाणा सरकार में खेल मंत्री हैं।


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