दादा ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट, पिता युवराज के कोच, कौन हैं भारतीय क्रिकेट के नए हीरो राज बावा
टारूबा एक तरफ जहां साउथ अफ्रीका में भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम लगातार सीरीज गंवा रही है तो दूसरी ओर हमारी अंडर-19 टीम रोज नए किले फतह कर रही है। वेस्टइंडीज में जारी अंडर-19 (under-19 cricket world cup) वर्ल्ड कप में शनिवार देर रात भारत ने धमाल कर दिया। पहले यूंगाडा के सामने 405 रन का स्कोर खड़ा किया। बाद में 326 रन के विशाल अंतर से मैच जीत लिया। आइए आपको भारत की ओर से सर्वाधिक नाबाद 162 रन बनाने वाले राज बावा से मिलवाते हैं।। हॉकी ओलिंपिक मेडलिस्ट के पोते हैं राज राज अंगद बावा सिर्फ पांच साल के थे, जब उनके ओलिंपिक हॉकी मेडलिस्ट दादा त्रलोचन बावा का निधन हो गया, जो 1948 लंदन ओलिंपिक गेम्स में भारतीय टीम का हिस्सा थे। चंडीगढ़ के रहने वाले 19 साल के राज को घर से ही स्पोर्ट्स का माहौल मिला। पिता सुखविंदर हरियाणा जूनियर टीम के लिए हॉकी खेलते थे। क्रिकेट में भी हाथ आजमाया। 1988 में अंडर-19 कैम्प के लिए भी सिलेक्ट हुए, लेकिन स्लिप डिस्क इंजरी के चलते मजबूरन महज 22 साल की उम्र से क्रिकेट कोचिंग में रच-बस गए। राज ने तोड़ा शिखर धवन का रिकॉर्ड राज फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर हैं। पहले मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ चार विकेट चटकाए। दूसरे मुकाबले में आयरलैंड के विरुद्ध 42 रन मारे तो अब यूंगाडा के खिलाफ 108 गेंदों में 162 रन की ताबड़तोड़ पारी खेल डाली, जिसमें 14 चौके और आठ छक्के शामिल थे। शिखर धवन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अब वह अंडर-19 वर्ल्ड कप इतिहास में भारत के सर्वोच्च स्कोरर भी बन गए हैं। गब्बर ने 2004 विश्व कप में स्कॉटलैंड के खिलाफ ढाका में 155 रन बनाए थे। युवी को देखकर बने लेफ्ट हैंडर बैट्समैनदिलचस्प है कि राज वैसे तो दाएं हाथ के पेसर हैं, लेकिन बल्लेबाजी लेफ्ट हैंड से करते हैं। ऐसा नहीं है कि वह शुरू से खब्बू बल्लेबाज थे। युवराज सिंह के करीब आने के बाद उन्होंने अपना स्टाइल बदला। युवराज सिंह, राज के पिता के भीतर ट्रेनिंग किया करते थे। वह राज के लिए हीरो हैं। युवी की ही तरह वह भी 12 नंबर की जर्सी पहनते हैं। युवराज सिंह का बर्थडे 12 दिसंबर को आता है तो राज 12 नवंबर को अपना जन्मदिन मनाते हैं। क्रिकेट के अलावा वह डांस और थिएटर के भी शौकीन हैं। वैसे भी राज पहले एक्टर बनना चाहते थे, लेकिन कोच पिता के साथ स्टेडियम मैच देखने गए तो वही से मन बना लिया कि अब गेंद और बल्ला ही थामना है। राज बावा में छिपा बेहतरीन ऑलराउंडर राज के पिता सुखविंदर कहते हैं, 'एक साल तक, मैंने उसके लैंडिंग पैरों पर काम किया। उसका एक्शन थोड़ा चोट को आमंत्रित करने वाला था, और एक बार यह ठीक हो जाने के बाद, मैंने उनसे कहा, 'सुनो, अब समय आ गया है कि गेंदबाजी को पीछे छोड़कर अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करो।' खुद को ऑलराउंडर बताने वाले राज अपनी स्किल्स का क्रेडिट पिता को देते हैं। बकौल राज, 'मेरे पिता समझते हैं कि मैं नेचुरली एक पेसर हूं इसलिए वह मेरी बल्लेबाजी पर ध्यान देना चाहते थे। इंजरी के डर से शुरुआत में मैंने ऑफ स्पिन गेंदबाजी शुरू की। मगर पंजाब अंडर -16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी कैंप में फिर से तेज गेंदबाजी शुरू की। आखिरकार वह पकड़ में आ ही गई।'
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