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सर मो फराह: रेस ट्रैक का बादशाह एथलीट जिसने झूठ की बुनियाद पर तीन दशक गुजार दिए

वह दुनिया का सबसे सफल पुरुष धावक है। ओलिंपिक में चार गोल्‍ड और वर्ल्‍ड चैंपियनशिप्‍स में छह गोल्‍ड मेडल जीत चुका है। आधुनिक ओलिंपिक खेलों के इतिहास में उनसे बड़ा ब्रिटिश एथलीट दूसरा नहीं। यूनाइटेड किंगडम उनपर खूब प्यार, सम्‍मान लुटा चुका है मगर अब मोहम्‍मद फराह को डर है कि कहीं उनकी नागरिकता न छीन ली जाए। यह डर बेजा नहीं है। मो फराह ने अपनी बीती जिंदगी के बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए हैं कि उनकी नागरिकता खतरे में पड़ सकती है।फराह ने बचपन से यह राज छिपाकर रखा था। अब उन्‍होंने बताया है कि उन्‍होंने सरकारी दस्‍तावेजों में झूठी जानकारी दी। फराह को 8-9 साल की उम्र में अवैध तरीके से इंग्‍लैंड लाया गया था। पेट भरने की शर्त पर उन्‍हें उसी परिवार के लिए नौकर का काम करना पड़ा, जिसने उन्‍हें पनाह दी थी। ब्रिटिश नागरिकता के लिए मो फराह नाम दिया जो कि झूठा है। उनका असली नाम हुसैन आब्‍दी कहिन है।

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