गांगुली और द्रविड़ का नाम बाजार में उछालने वाले ऋद्धिमान साहा की जर्नलिस्ट मामले पर क्यों जागी इंसानियत?
भारत में लोग क्रिकेट और क्रिकेटरों से बहुत प्यार करते हैं और शायद यही वजह है कि संन्यास ले लेने की सारी पुख्ता वजहें होने के बावजूद भारतीय क्रिकेटर 'एक और मैच' खेलने के मोह से खुद को अलग नहीं कर पाता है। हमारे पास विदेशों से कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां बड़े-बड़े प्लेयर्स ने समय से कहीं पहले और बिना किसी शोर शराबे के क्रिकेट को अलविदा कहा है। मगर भारत में देखें तो कई बड़े क्रिकेटर मैदान पर हंसी का पात्र बनने के बाद सिलेक्टर्स, कप्तान या अन्य किसी पर उसके करियर को समय से पहले समाप्त करने का दोष मढ़ते हुए क्रिकेट के मैदान से बाहर निकले हैं। हाल में कुछ ऐसा ही सीन भारतीय क्रिकेट के अनुभवी विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा को लेकर बनता दिख रहा है। श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट टीम में नहीं चुने जाने के बाद उनके खुलासे सुर्खियों में हैं। साहा ने बीसीसीआई के प्रेजिडेंट सौरव गांगुली, टीम इंडिया के हेड कोच राहुल द्रविड़ और चीफ सिलेक्टर चेतन शर्मा से निजी तौर पर हुई बातचीत को बाजार में फैला दिया।
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