'नहीं ग्रैग, तुम यह नहीं कर सकते'- ऑस्ट्रेलिया के दो भाई, वह 'बदनाम' गेंद और इसके बाद हमेशा के लिए बदल गया क्रिकेट
नई दिल्ली: फरवरी की पहली तारीख थी। और साल था 1981 का। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच वनडे फाइनल खेला जा रहा था। मैदान था मेलबर्न का। न्यूजीलैंड को मैच की आखिरी गेंद पर जीत के लिए सात रन चाहिए थे। और मैच को टाई करने के लिए उसे छह रन चाहिए थे। गेंदबाजी करने वाली कोई भी टीम इस समय जीत की प्रबल दावेदार मानी जाएगी। आप अपने गेंदबाज पर भरोसा करेंगे कि वह ऐसी गेंद फेंकेगा जिससे टीम की नैया पार लग जाएगी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ग्रैग चैपल की सोच कुछ अलग थी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में चार विकेट पर 235 रन बनाए। कप्तान ग्रैग चैपल ने 90 रन की पारी खेली। ग्रीम वुड ने 72 रन बनाए। जवाब में ब्रूस एल्गर ने सेंचुरी लगाई। 49.5 ओवर में न्यूजीलैंड का स्कोर 8 विकेट पर 229 रन था। आखिरी गेंद पर उसे जीत के लिए सात रन चाहिए थे। जीत मुश्किल थी लेकिन छक्का मैच को टाई कर सकता था। न्यूजीलैंड इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रैग चैपल इस खतरे को मोल नहीं लेना चाहते थे। हारना उन्हें मंजूर नहीं था। चैपल ने कुछ ऐसा करने या करवाने की सोची, जिसकी खूब आलोचना हुई। और आज 41 साल बाद भी होती है। वह न्यूजीलैंड के ब्रायन मैकंजी से डर गए। वह मैकंजी जिन्होंने अपने वनडे करियर के 14 मैचों में कुल 54 रन बनाए। उन्होंने अपने गेंदबाज ट्रेवर, जो उनके छोटे भाई भी थे, को अनोखे अंदाज में गेंदबाजी करने की बात कही। बात अलग थी। उन्होंने जैसे गेंदबाजी करने को कहा वह लीगल तो था लेकिन भद्रजनों की खेल भावना के बिलकुल विपरीत। ग्रैग ने ट्रेवर से कहा कि वह अंडर-आर्म फेंके। जी, वैसे ही जैसे आप कई बार छोटे बच्चों को गेंद फेंकते हैं। तरीका काम कर गया। ऑस्ट्रेलिया ने मुकाबला छह रन जीत लिया। मैच तो जीत लिया लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने कई दोस्त गंवा दिए। उसकी खूब आलोचना हुई। जीत के लिए इस हद तक जाना खेल देखने वालों को नगवार गुजरा। क्रिकेट के कर्ता-धर्ता फौरन ऐक्शन में आए। अंडर-ऑर्म गेंदबाजी को तत्काल बैन कर दिया गया। ग्रैग और ट्रेवर के भाई इयान चैपल उस समय कॉमेंट्री कर रहे थे। वह भी अपने भाई की इस हरकत से बेहद खफा दिखे। उन्होंने कॉमेंट्री के दौरान कहा, 'नहीं ग्रैग, तुम यह नहीं कर सकते।'
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