भारत का वह गुस्सैल क्रिकेटर, जिसने गढ़ी एंग्री यंग मैन की नई परिभाषा
नई दिल्लीहरभजन सिंह जब महज 31 साल के थे तभी 400 विकेट ले चुके थे। आसानी से 500 विकेट के पार जा सकते थे, लेकिन जब 2011 में उन्होंने चोट से वापसी की तो चयनकर्ता उनसे परे देखना शुरू कर चुके थे। भज्जी भारतीय जर्सी के साथ शानदार तरीके से करियर का अंत करना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 23 साल लंबे करियर को उन्होंने शुक्रवार को अलविदा कह दिया।हरभजन ने 2016 में अंतिम बार भारत के लिए नीली जर्सी पहनी थी, वह पिछले कुछ वर्षों में आधा संन्यास ले चुके थे, लेकिन ‘टर्बनेटर’ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से संन्यास की घोषणा कर दी, जिससे भारतीय क्रिकेट के सबसे आकर्षक अध्याय का अंत हो गया।

नई दिल्ली
हरभजन सिंह जब महज 31 साल के थे तभी 400 विकेट ले चुके थे। आसानी से 500 विकेट के पार जा सकते थे, लेकिन जब 2011 में उन्होंने चोट से वापसी की तो चयनकर्ता उनसे परे देखना शुरू कर चुके थे। भज्जी भारतीय जर्सी के साथ शानदार तरीके से करियर का अंत करना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। 23 साल लंबे करियर को उन्होंने शुक्रवार को अलविदा कह दिया।
टीम इंडिया का एंग्री यंग मैन

आज भले ही टीम इंडिया ब्रांड कोहली का क्रिकेट खेलती हो, लेकिन पहले सौरव गांगुली को छोड़कर कोई खिलाड़ी इतना आक्रामक नहीं था। भज्जी पर अपने फेवरेट कप्तान की पूरी परछाई पड़ी थी। वह भी मैदान पर हमेशा अटैकिंग मोड में होते। खासतौर पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स से उनका 36 का आंकड़ा किसी से छिपा नहीं। वहीं ‘मंकीगेट’ कांड में उन पर एंड्रयू साइमंड्स ने नस्लीय टिप्प्णी का आरोप लगाया था और इसका उन पर मानसिक तौर पर असर पड़ा जो उन्हें समय बीतने के साथ महसूस भी हुआ। आईपीएल के दौरान श्रीसंत को जड़े थप्पड़ ने उन्हें पहले सीजन से सस्पेंड करवा दिया था।
सच बोलने से नहीं हिचकते थे

हरभजन अपनी सभी कमजोरियों, नाराजगी, विवादों और कई खामियों के साथ अपने ही तरीके में बहुत ही अलग थे। भज्जी सौरव गांगुली के दिल के काफी करीब थे। वह सौरव गांगुली ही थे, जिनकी दूरदर्शिता ने शायद उन्हें 2000 के शुरू में पिता के निधन के बाद अमेरिका में जाकर बसने से रोक दिया। हरभजन ने कभी भी सच्चाई को कहने में झिझक नहीं दिखाई। एक बार राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में बासी खाने के विरोध में तब के प्रमुख हनुमंत सिंह द्वारा बाहर भी कर दिये गए थे। उनके गेंदबाजी एक्शन पर भी सवाल उठाए गए थे और दो बार उन्हें इस एक्शन टेस्ट कराना पड़ा जिसमें वह ठीक पाए गए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जोश दोगुना हो जाता

दुनिया के हर दिग्गज को बनाया शिकार

हरभजन सिंह ने अपने करियर में रिकी पोंटिंग, मैथ्यू हेडन, एडम गिलक्रिस्ट, डेमियन मार्टिन, स्टीव वॉ, जैक कैलिस, एंड्रयू फ्लिंटाफ जैसे दिग्गजों को कई बार अपना शिकार बनाया। अगर कोई हरभजन के 2001 से 2011 के सर्वश्रेष्ठ वर्षों को देखकर आंकलन करे तो भारत मुश्किल से इस दौरान स्पिनरों के लिए मददगार पिच पर खेला, कि मैच दो से ढाई दिन में खत्म हो गए हों। भारत में जब अनिल कुंबले और हरभजन सिंह सबसे घातक मैच विजेता गेंदबाजी जोड़ी थी तब भारत ने ज्यादातर मैच चौथे या पांचवें दिन के शुरू में जीते।
सांप की तरह सरसराती गेंदें

अक्सर विकेटकीपर कहते कि जब हरभजन लय में हो तो गेंद सांप की तरह की सरसराती आवाज निकालती। कोई भी उनसे पहले ऐसा नहीं कर पाया और जालंधर के इस स्पिनर के बाद से कोई भी अब भी उनकी तरह नहीं सकता है। वर्ष 2007 से 2011 के बीच तब के कोच गैरी कर्स्टन के मार्गदर्शन में उन्हें नई जिंदगी दी जिसमें वह सफेद गेंद के शानदार गेंदबाज बन गए। बाद में आईपीएल के आने के बाद वह टी-20 गेंदबाजी में रन रोकने में सर्वश्रेष्ठ बन गए, उन्होंने लीग में 150 विकेट चटकाए जिसमें से ज्यादातर मुंबई इंडियंस के लिए थे। पर 2011 से 2016 के बीच उनका करियर नीचे जाने लगा जिसमें रविचंद्रन अश्विन की स्पिन ने कमाल दिखाना शुरू किया।
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