टी20 वर्ल्ड कप से पहले IPL, टीम इंडिया के लिए 'हार' का परफेक्ट मसाला?
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) असल में टी20 वर्ल्ड के लिए सही मायनों में तैयारी का एक मंच होना चाहिए। लेकिन, तस्वीर जरा अलग है। जब भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप के नॉक आउट के लिए क्वॉलिफाइ नहीं कर पाई है तो हर बार उसने वर्ल्ड कप से पहले आईपीएल में भाग लिया है। वहीं साल 2007 में जब उसने खिताब जीता, तब आईपीएल नहीं था। वहीं साल 2014 और 2016 जब टीम क्रमश: सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंची है, तो वर्ल्ड कप के फौरन बाद आईपीएल हुआ था।UAE में ही आईपीएल है, यहीं पर टी20 वर्ल्ड कप खेला जाना है। भारतीय खिलाड़ियों को इससे बहुत फायदा होगा- टी20 वर्ल्ड कप से पहले ऐसी बातें खूब कही जा रहीं थीं। लेकिन नतीजा हमारे सामने है। बल्कि आप आंकड़ों को देखें तो आईपीएल जब भी वर्ल्ड कप टी20 से पहले हुआ है नतीजा भारतीय टीम के खिलाफ ही रहा है। खिलाड़ियों को इससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ है।

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) असल में टी20 वर्ल्ड के लिए सही मायनों में तैयारी का एक मंच होना चाहिए। लेकिन, तस्वीर जरा अलग है। जब भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप के नॉक आउट के लिए क्वॉलिफाइ नहीं कर पाई है तो हर बार उसने वर्ल्ड कप से पहले आईपीएल में भाग लिया है। वहीं साल 2007 में जब उसने खिताब जीता, तब आईपीएल नहीं था। वहीं साल 2014 और 2016 जब टीम क्रमश: सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंची है, तो वर्ल्ड कप के फौरन बाद आईपीएल हुआ था।
तीन बातों पर देना है ध्यान

टीम इंडिया के पूर्व ट्रेनर रामजी श्रीनिवासन, जो 2009-13 के बीच भारतीय टीम के साथ थे, ने तीन मुद्दों पर ध्यान दिलाया है। खिलाड़ी, टी20 वर्ल्ड कप से पहले ही अपने खेल के चरम पर पहुंच जाते हैं। नए इवेंट में खुद को ढाल नहीं पाते जहां एक लंबी लीग के मुकाबले गलती करने की गुंजाइश बहुत कम है। और तीसरा, थकान। रामजी ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'खिलाड़ी फ्रैंचाइजी लीग में अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश करते हैं और आईपीएल के अंतिम चरण में अपने खेल के सर्वश्रेष्ठ मुकाम पर पहुंच जाते हैं। दो सप्ताह के भीतर ऐसा सर्वश्रेष्ठ मुकाम दोबारा हासिल करना बहुत मुश्किल होता है।'
आईपीएल में मिलते हैं कई मौके

आईपीएल में टीमों को 14 मैच मिलते हैं। इस दौरान उन्हें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। रामजी ने कहा, 'लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में एक या दो बुरे दिन और इससे इवेंट में आपका सफर समाप्त हो जाता है। ऐसा हमारे साथ 2009-12 के दौरान हो चुका है।' उन्होंने यह भी कहा कि लगातार इस फॉर्मेट में खेलते रहने से खिलाड़ियों को काफी थकान भी हो जाती है।
कब कैसा रहा है प्रदर्शन

एक नजर डालते हैं कि चार ऐसे टी20 वर्ल्ड कप पर जब भारतीय टीम नॉक आउट में जगह नहीं बना पाई है। या लगभग बाहर है।
साल 2009 में कैसा रहा प्रदर्शन

साल 2009 का आईपीएल साउथ अफ्रीका में हुआ था। यह 18 अप्रैल से 24 मई के बीच खेला गया। वहीं 5 जून को टी20 वर्ल्ड कप की शुरुआत हुई। भारतीय खिलाड़ियों को साउथ अफ्रीका में दो महीने लंबा टूर्नमेंट खेलने के बाद आराम का बिलकुल मौका नहीं मिला। सफर और खेल की थकान का असर नजर आया। साउथ अफ्रीका से टीम टी20 वर्ल्ड कप खेलने इंग्लैंड पहुंची। यहां की परिस्थितियों के साथ वह बिलकुल तालमेल नहीं बैठा पाई। भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की टीम सुपर 8 के तीन मुकाबले हारी। उसे वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड ने हराया। कोच गैरी किर्स्टन ने कहा कि खिलाड़ियों पर आईपीएल की थकान थी। यहां यह बात भी ध्यान देने की है कि पाकिस्तान जो आईपीएल का हिस्सा नहीं था, इस टूर्नमेंट का चैंपियन बना।
2010 में भी वही कहानी

इस बार आईपीएल का फाइनल 25 अप्रैल को था। और भारतीय टीम इसके बाद टी20 वर्ल्ड कप में भाग लेने के लिए वेस्टइंडीज पहुंची। यह टूर्नमेंट 30 अप्रैल को शुरू हुआ। इस बार भी भारतीय टीम ने सुपर 8 में बहुत खराब प्रदर्शन किया। टीम को वेस्टइंडीज की धीमी पिचों पर ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और वेस्टइंडीज ने हराया। भारत के आक्रामक बल्लेबाज इन विकेटों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए।
बात थोड़ी अलग, पर नतीजा वही

2012 को शायद आप सीधे आईपीएल से नहीं जोड़ पाएं क्योंकि इस बार भारतीय टीम श्रीलंका में वर्ल्ड कप खेलने आईपीएल के दो महीने बाद गई थी। पर, जैसाकि रामजी ने कहा कि खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के चरम पर आईपीएल के दौरान पहुंच गए थे और ऐसे में उसी को वर्ल्ड कप में दोहरा पाना आसान नहीं होता। उन्होंने सुपर 8 में दो मैच जीते और नेट रन रेट के आधार पर टूर्नमेंट से बाहर हो गए। इस ग्रुप से ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान आगे गए।
2021... फिर वही कहानी

अगर कोविड नहीं होता तो भारतीय टीम आईपीएल के दूसरे फेस के फौरन बाद टी20 वर्ल्ड कप खेलने पहुंच जाती। पर जैसाकि जसप्रीत बुमराह ने इशारा किया कि बबल-थकान खिलाड़ियों के प्रदर्शन की एक वजह हो सकता है। खिलाड़ी इंग्लैंड में लंबी सीरीज खेलने के बाद से सितंबर से ही यूएई में हैं। यूएई की पिचों पर आईपीएल खेलने के बाद जो बात कही जा रही थी कि खिलाड़ियों को इससे फायदा होगा। आईपीएल का अनुभव उनके काम आएगा, पूरी तरह गलत साबित हुईं। पाकिस्तान और इंग्लैंड, जिसके खिलाड़ी अधिक तरोताजा थे, ने अभी तक ज्यादा खतरनाक प्रदर्शन किया है।
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