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India vs England: क्यों विराट कोहली के हाथों में है भारत की कायमाबी की चाभी

नई दिल्ली भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज के चौथे मैच से पहले काफी हलचल मची है। और क्या इस सबके बीच भारतीय टीम अपने लिए कोई मौका तलाश सकती है। सीरीज के नतीजे के लिहाज से यह मैच काफी अहम होने वाला है। भारतीय टीम का प्रदर्शन कैसा रहेगा यह काफी हद तक उसके करिश्माई कप्तान पर भी निर्भर करेगा। अन्य प्रभावशाली कप्तानों की तरह कोहली ने भी इस टीम को एक लड़ने वाली और रिसोर्सफुल टीम बनाया है। लेकिन, बेशक ऐसा वक्त आता है जब बंधे-बधाए नियम, फॉर्म्युला, टिप्स और स्वभान काम नहीं करते। कोहली के लिए यह समय वही है। क्रिकेट की दुनिया में कहा जाता है कि बल्ले से निकले रनों का असर कप्तानी पर नजर आता है। उसमें निखार आता है। तो यह भी स्वाभाविक है कि कोहली के चरित्र की अहम खूबियां- आत्मविश्वास, स्वैग, संसाधनपूर्णता, मुश्किल वक्त में टीम को अपनी ऊर्जा से प्रेरित करना- इस सबका संतुलन तभी तक बना रहेगा जब तक वह रन बना रहे हैं। और अब कोहली का बल्ला उनसे रूठा हुआ है। ऐसा कोहली के परंपरागत रूप से फॉर्म से बाहर न होने के बावजूद ऐसा हुआ है। कोहली ने लीड्स टेस्ट के बाद कहा था कि टीम प्रबंधन व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर चयन नहीं करेगा बल्कि उसका पूरा ध्यान सिर्फ टीम पर है। लेकिन लगता है कि इसके उलट ्पनी बल्लेबाजी को लेकर कोहली जरूर विचार करना चाहेंगे। वह ड्राइंग बोर्ड पर जाकर देखेंगे कि कहां चूक हो रही है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है। 2014 में इंग्लैंड सीरीज में असफल होने के बाद भी उन्होंने ऐसा ही किया था। कोहली के लिए यह आसान नहीं होगा क्योंकि हर एक्सपर्ट ने उनकी तकनीक में एक या दो कमी निकाल ली है। 'कोहली के कंधों के संतुलन से लेकर उनके बैकफुट की पोजिशन से लेकर उनके शॉट सिलेक्शन और क्रीज से बाहर खड़े होने' तक सभी को जिम्मेदार ठहराया गया है। कोहली को फ्रंटफुट पर आने की आदत है और इस वजह से अंदर आती गेंदों ने उन्हें परेशान किया है। कोहली इंग्लैंड में लगातार बल्ले का बाहरी किनारा लगने पर विकेट के पीछे लपके जा रहे हैं। गेंद गुड लेंथ पर टप्पा खा रही है और भारतीय कप्तान उस पर संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि रनों का यह सूखा इंग्लैंड सीरीज से ही शुरू हुआ है। 81 टेस्ट मैच बाद कोहली का करियर औसत 55.10 का रहा है। अक्टूबर 2019 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 254 रन बनाए थे। तब से खेले गए 14 टेस्ट मैचों में उनका औसत 28.04 का ही रहा है। बांग्लादेश के खिलाफ अपने आखिरी टेस्ट शतक के बाद उन्होंने 11 टेस्ट मैचों में उन्होंने 24.68 के औसत से रन बनाए हैं। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डंस में सेंचुरी लगाई थी। कोहली रन बनाने की गति को भी बनाए रखते हैं। 81 मैचों के बाद उनका उनका स्ट्राइक रेट 57.63 का है। वहीं बीते 11 टेस्ट मैचों में यह कम होकर 42.90 का है। बीती 19 टेस्ट पारियों में उन्होंने कोई शतक नहीं लगाया है। यह सुखद संकेत है कि कोहली ने आठ टेस्ट पारियों के बाद हाफ सेंचुरी लगाई। हालांकि, इस हाफ सेंचुरी में कोहली कहीं से भी अपने पुराने रंग में नहीं दिखे। कोहली का मुश्किल दौर चल रहा है लेकिन महान बल्लेबाज जानते हैं कि ऐसा वक्त आता-जाता रहता है। शुरुआत में कोहली को अपनी तय धारणाओं से हटना होगा। कई बार आगे बढ़ने के लिए आपको पीछे हटना पड़ता है। कोहली के लिए भी शायद यह तरकीब काम कर जाए।


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