Breaking News

राजस्थान के पैरालिंपिक को कई महीनों बाद मिली सैलरी, अधिकारी ने बताया कारण

जयपुर तोक्यो पैरालिंपिक में मेडल जीतने के बाद की नींद खुली है। अब उसे अहसास हुआ है कि उसने तीन पैरालिंपिक मेडलिस्ट को अभी तक सैलरी नहीं दी है। निशानेबाजी में गोल्ड मेडल जीतने वालीं अवनि लखेड़ा हों, जैवलिन में सिल्वर मेडल जीतने वाले देवेंद्र झाझरिया हों या फिर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले सुंदर सिंह गुर्जर, इन तीनों को हाल तक उनकी पहली तनख्वाह भी नहीं मिली थी। इन्हें पांच से 10 महीने पहले नौकरी पर रखा गया था लेकिन वेतन अभी तक बकाया था। पिछले बुधवार एक अधिकारी ने कहा था कि उनका बकाया चुका दिया गया है। हालांकि इस बात की सच्चाई तब सामने आई जब झाझरिया और गुर्जर के परिवारवालों ने बताया कि जब से नौकरी मिली है तब से उन्हें कोई पैसा नहीं मिला है। राजस्थान वन-विभाग ने कहा, कागजात पूरे नहीं लखेड़ा को जहां 16 अप्रैल को भर्ती किया गया था वहीं झाझरिया और गुर्जर को वन-विभाग द्वारा क्रमश: 5 नवंबर और एक दिसंबर 2020 को भर्ती किया गया था। वन-विभाग ने दावा किया था कि कागजात पूरे नहीं होने पर उनकी तनख्वाह में देरी हुई। ऐसा इसलिए हुआ कि तीनों राज्य के बाहर रहकर तोक्यो गेम्स की तैयारी कर रहे थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'एक कर्मचारी को स्थायी रिटायरमेंट नंबर बनवाने और उसे आधार से लिंक करवाने के लिए शारीरिक रूप से मौजूद होना जरूरी है। चूंकि ये लोग राजस्थान में नहीं थे, यह हो नहीं सका। इसके साथ ही इन तीनों ने आधिकारिक रूप से राज्य सचिवालय में नौकरी जॉइन की थी न कि अरण्य भवन (राज्य के वन विभाग का मुख्यालय)।' दीप नारायण पांडे, जिन्हें हाल ही में फॉरेस्ट फोर्स का मुखिया नियुक्त किया गया है, ने मामला सामने आने के बाद कहा कि सैलरी देने के लिए नियमों को आसान बनाने की जरूरत है।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/3DPNQC6

No comments