क्यों रोका गया पैरालिंपियन विनोद कुमार का ब्रॉन्ज मेडल, कब तक आएगा फैसला, जानें सबकुछ
तोक्यो पैरालिंपिक खेलों में रविवार का दिन खत्म होते-होते भारत की झोली में तीन मेडल आ चुके थे। देशभर में खुशी का माहौल था। पीएम मोदी तक ने ट्वीट कर भारतवासियों को बधाई दे दी थी, लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि चक्का फेंक एथलीट विनोद कुमार का ब्रॉन्ज मेडल रोक दिया गया है। बीएसएफ के 41 साल के जवान विनोद कुमार ने 19.91 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो से एशियाई रेकार्ड बनाते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। वह पोलैंड के पियोट्र कोसेविज (20.02 मीटर) और क्रोएशिया के वेलिमीर सैंडोर (19.98 मीटर) के पीछे रहे जिन्होंने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किए। क्या है पूरा मामला? डिस्कस थ्रो ऐथलीट विनोद कुमार ने पुरूषों की F52 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, लेकिन उनकी दिव्यांगता क्लासीफिकेशन पर विरोध के बाद पदक रोक दिया गया है। आयोजकों ने 22 अगस्त को विनोद का क्लासिफिकेशन किया था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किस आधार पर क्लासिफिकेशन को चुनौती दी गई है। खेलों के आयोजकों के एक बयान के अनुसार पदक समारोह भी 30 अगस्त के शाम के सत्र तक स्थगित कर दिया गया है। क्या होती है F52 स्पर्धाइस कैटेगरी में वो एथलीट हिस्सा लेते हैं, जिनकी मांसपेशियों की क्षमता कमजोर होती है और उनके मूवमेंट सीमित होते हैं, हाथों में विकार होता है या पैर की लंबाई में अंतर होता है, जिससे खिलाड़ी बैठकर प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हैं। भारत के दल प्रमुख गुरशरण सिंह ने कहा कि विनोद कुमार का पदक अभी बना रहेगा। उन्होंने कहा, ‘विरोध एक देश या शायद एक से ज्यादा देश से हो सकता है, हम नहीं जानते क्योंकि इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। विनोद का पैरालिंपिक शुरू होने से पहले जो क्लासिफिकेशन किया गया था, उसमें कुछ मुद्दा हो सकता है।’ सोमवार को आएगा फैसला भारत के दल प्रमुख गुरशरण सिंह ने बताया कि, ‘विनोद का नतीजा जो कांस्य पदक है, वो अब भी बरकरार है और इस संबंध में फैसला आज आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अब बहुत देर हो गई है। इस पर कल फैसले की उम्मीद है।' इन दोनों एथलीटों के पदकों से पहले भाविनाबेन पटेल ने सुबह महिलाओं की एकल टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा में रजत पदक जीता था। भारत के 24 सदस्यीय एथलेटिक्स दल से इस बार शानदार प्रदर्शन (कम से कम 10 पदक) की उम्मीद है और उसने इसी कड़ी में रविवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर अच्छी शुरूआत की। निषाद ने लॉन्ग जंप में जीता मेडल 21 वर्षीय निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की कूद लगाकर एशियाई रेकॉर्ड बनाया और दूसरे स्थान पर रहे। अमेरिका के डलास वाइज को भी रजत पदक दिया गया क्योंकि उन्होंने और निषाद कुमार दोनों ने समान 2.06 मीटर की कूद लगाई। एक अन्य अमेरिकी रोडरिक टाउनसेंड ने 2.15 मीटर की कूद के विश्व रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में एक अन्य भारतीय राम पाल 1.94 मीटर की कूद से पांचवें स्थान पर रहे। किसान के बेटे हैं निषाद हिमाचल प्रदेश के अम्ब शहर के निषाद कुमार के पिता किसान हैं। उनका दायां हाथ खेत पर घास काटने वाली मशीन से कट गया था तब वह आठ वर्ष के थे। साल के शुरू में जब वह बेंगलुरू के भारतीय प्राधिकरण केंद्र में ट्रेनिंग कर रहे थे तो कोविड-19 से भी संक्रमित हो गए थे। टी47 क्लास स्पर्धा में एथलीट के एक हाथ के ऊपरी हिस्से में विकार होता है जिससे उसके कंधे, कोहनी और कलाई से काम करने पर कुछ असर पड़ता है। निषाद कुमार ने साल के शुरू में दुबई में हुई फाज्जा विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में पुरूषों की ऊंची कूद टी46/47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 2009 में पैरा एथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया था। भाविनाबेन ने दिलाया पहला मेडल तोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत का खाता भाविनाबेन ने खोला था। वह पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी बनी हैं। वह टेबल टेनिस क्लास 4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी चीन की झाउ यिंग से 0-3 से हार गई थी। भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालिंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालिंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी।
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