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'कॉम ठीक था पर मेरी कॉम नहीं' ओलिंपिक में जर्सी पर कैसा विवाद, क्या कहते हैं नियम

तोक्योओलिंपिक में कुछ भारतीय मुक्केबाजों की पोशाक पर उनका नाम और देश का नाम नहीं होने पर विवाद हुआ जिसमें दिग्गज एमसी मेरी कॉम ने भी आरोप लगाया था कि आयोजकों से उचित स्पष्टीकरण के बिना उनके अंतिम -16 मुकाबले से कुछ मिनट पहले पोशाक बदलने पर मजबूर कर दिया था। मेरी कॉम गुरुवार को और फिर लवलीना बोरगोहेन शुक्रवार को जब रिंग में उतरीं तो उनकी पोशाक के पीछे ना तो उनका नाम था ना ही देश का नाम। प्री-क्वॉर्टर फाइनल मैच में अपने मुकाबले को 2-3 से गंवाने के बाद मेरी कॉम ने कहा था, ‘यह थोड़ा परेशान करने वाला था कि उन्होंने मुझे बाउट से ठीक पांच मिनट पहले ड्रेस बदलने के लिए कहा। उस समय दरअसल, मेरे नाम की घोषणा हो चुकी थी।’ उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि मुझे परेशान करने के लिए यह जानबूझकर की गई कार्रवाई थी। मैंने पहले राउंड के मैच को इसी तरह के कपड़े में जीत दर्ज की थी। वहां भी मेरा नाम मेरी कॉम और भारत लिखा था।’ भारतीय मुक्केबाजी के हाई परफार्मेंस निदेशक सैंटियागो नीएवा के साथ बातचीत और अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के नियमों को देखने के बाद इस विवाद की जड़ के बारे में पता चला। नीएवा ने कहा, ‘मुक्केबाजों को अपने उपनाम या दिए गए नाम को पोशाक पर इस्तेमाल करने की अनुमति है। ऐसे में अगर उसके पीठ पर कॉम होता, तो कोई समस्या नहीं होती या सिर्फ मांगटे भी ठीक था।’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें मेरी कॉम लिखे कपड़े को पहनने की इजाजत नहीं थी। लवलीना के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनके कपड़े पर भी पूरे नाम की जगह बोरगोहेन होना चाहिए था। नीएवा ने कहा, ‘इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं है। हमने लवलीना के लिए नई ड्रेस मंगाई है। वह सेमीफाइनल में उसे ही पहनेंगी।’ मेरी कॉम की शिकायत यह थी कि उन्हें बिना करण बताये ही मुकाबले से ठीक पहले कपड़े को बदलने पर मजबूर किया गया। नीएवा ने कहा कि यह टीम के तौर पर यह बड़ा मुद्दा नहीं हैं उन्होंने कहा, ‘देखिये, जब तक आपको रिंग में उतरने से रोका नहीं जा रहा है तब तक कोई समस्या नहीं है।’ ड्रेस को लेकर पर आईओसी के नियम कहते हैं कि ‘ऐथलीट का नाम (पारिवारिक नाम) ड्रेस के पीछे (पीठ पर) लिखा जा सकता है’ और राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रीय ओलिंपिक समिति के प्रतीक को ‘बनियान, शॉर्ट्स और स्कर्ट पर तय जगह पर इस्तेमाल की अनुमति है।’


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